अल्लाह तआला की रहमत की विशालता / Allah ki rehmat

अल्लाह तआला की रहमत की विशालता -

अल्लाह तआला की रहमत की विशालता

चुनाँचे नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक बार एक काफिले को देखा एक माँ परेशान थी | उसको अपने सर पर दुपट्टे का होश भी नहीं था उसका बेटा गुम हो गया था वह भागी फिर रही थी | लोगों से पूछती थी किसी ने मेरे बेटे को देखा हो तो मुझे बताओ | यह मन्ज़र भी अजीब होता है कि माँ का जिगर का टुकड़ा उससे जुदा हो उस पर क्या गुज़रती है उसका दिल मछली की तरह तड़प रहा होता है | शब्दों में बयान नहीं कर सकती कि उस पर क्या मुसीबत गुज़रती है | उसकी आँखें तलाश कर रही होती हैं कि मेरा बेटा मुझे नज़र आ जाये | नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम से पूछाः यह माँ अपने बेटे की वजह से परेशान है अगर इसे इसका बेटा मिल जाये तो क्या यह उसको आग में डाल देगी | माँ की मुहब्बत व ममता रज़ियल्लाहु अन्हुम मेरा कहा ऐ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम कभी नहीं डालेगी | इतनी मुहब्बत है इसको बच्चे से यह तो गवारा नहीं करेगी | नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया | जिस तरह माँ अपने बच्चे को आग में डालना गवारा नहीं करती इसी | तरह अल्लाह रब्बुल् इज्ज़त भी मोमिन बन्दे को आग में डालना गवारा करते | तो अल्लाह तआला से माफी माँगनी तो बहुत आसान है | इसलिए कि उनकी मुहब्बत तो सारी दुनिया की माँओं से सत्तर गुना ज़्यादा है | हदीस पाक में आता है कि एक नौजवान सहाबी थे उन्होंने अपनी माँ को नाराज़ कर रखा था | कोई तकलीफ पहुँचाई थी नाराज़ होकर धक्का दिया और माँ को चोट आ गयी तो वह दिल से नाराज़ थीं अब इन सहाबी की मौत का वक्त आ गया आखिरी वक्त की कैफियात तारी हैं मगर मौत नहीं आती नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में अर्ज़ किया गया | इरशाद फरमाया मैं खुद चलता हूँ | आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तशरीफ लाये सूरतेहाल भालूम की आपने उनकी वालिदा ( माँ ) से सिफारिश फ़रमायी कि अपने बेटे को माफ कर दे | वह कहने लगी मैं हरगिज़ माफ नहीं करूँगी | उसने मुझे इतना दुख दिया इतना सताया कि मैं उसे माफ कर ही नहीं सकती | जब आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने देखा कि यह अपनी बात पर अड़ी हुई है तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया लाओ आग के लिए लकड़ियाँ इकट्ठी करो | जब उसने यह सुना तो वह पूछने लगी कि लकड़ियाँ क्यों मंगवा रहे हैं आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया आग जलायेंगे और तुम्हारे बेटे को उस आग में डालेंगे तू उससे राज़ी जो नहीं हो रही | उसने जैसे ही यह सुना दिल मोम हो गया | कहने लगी ऐ अल्लाह के नबी मेरे बेटे को आग में न डालिये मैंने अपने बेटे की ग़लतियों को माफ कर दिया |


नाम - वसीम अल्वी 

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