Dua mangne ka tarika in hindi | दुआ मांगने का तरीका - Mera Islam

दुआ मांगने का तरीका ( dua mangne ka tarika ) -

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बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम (Click Letest Blog)
नबी पाक सलल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया अल्लाह तआला के सबसे नजदीक वह होता है जो पूरे मन से अपने लिए और दूसरों के लिए दुआ मांगता है और जो लोग दूसरों के हक में दुआ मांगते है उनसे अल्लाह तआला बहुत खुश होते है लेकिन सिर्फ अल्लाह तआला से ही मांगना चाहिए क्योकि उस के उसके सिवा कोई माबूद नहीं है और दुआ मांगते रहना चाहिए और अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की मगफिरत करना चाहिए जिस से अल्लाह पाक हमारे गुनाहों को माफ कर देता है|अल्लाह तआला की इबादत और भी इबादत होती है और दुआ भी एक इबादत है अल्लाह पाक के सामने अपने आप को बिल्कुल कमजोर समझे और अपने आप को बिल्कुल छोटा समझे जो लोग सिर्फ अल्लाह तआला से सवाल करते हे उन लोगो से अल्लाह तआला हमेशा राजी रहता है जब बंदा अल्लाह तआला से दुआ करता है तो वह अपने आप को बिल्कुल अल्लाह तआला के रूबरू समझता है और वह सिर्फ दुआ में खो जाता है जब अल्लाह तआला से दुआ करे तो पूरी मजबूती के साथ मांगे और यह समझे के मेरी दुआ जरूर कबूल होगी|अल्लाह के रसूल सल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम दुआ करते समय तब तक हाथ निचे नहीं करते थे जब तक अपने चेहरे पर अपने हाथों को फेर न ले नबी सलल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फ़रमाया की  बंदा दुआ करने के लिए अपने हाथ फैलता है तो अल्लाह तआला कभी यह नहीं चाहता के मेरा बंदा खाली हाथ  लौटे और वह उसकी दुआ जरूर क़ुबूल फरमाता है|

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दुआ कब क़ुबूल होती हैं (Dua mangne ka tarika)

कुछ लोगों के मन में यह सवाल रहता हैं की हम नमाज के बाद दुआ कैसे मांगे उस का सही तरीका क्या हैं इसी तरह जब हम अपने रब की बारगाह में दुआ मांगे तो किस अंदाज में अपने रब की बारगाह में दुआ मांगे जब बंदा रब की बारगाह में दुआ मांगता हैं तो अल्लाह रब्बुल इज्जत खुद कुरआने मजिद में इरशाद फरमाता हैं तुम मुझ से दुआ मांगो में तुम्हारी दुआ को क़ुबूल करूँगा तो बंदा जब रब की बारगाह में दुआ मांगता हैं तो अल्लाह रब्बुल इज्जत उसकी दुआ को क़ुबूल फरमाता हैं | कभी बंदा जाहिर तौर पर उस के असरात को देखता हैं और कभी बंदा समझ नहीं पाता हैं कुछ लोग यह कहते हैं की हमने दुआ मांगी और दुआ क़ुबूल नहीं हुई याद रखिये की अल्लाह रब्बुल इज्जत की बारगाह में जो कुछ आप मांगते हैं मेरा रब जरूर अता फरमाता हैं कभी ऐसा होता हैं की हमारे हक में वाह चीज बेहतर नहीं होती हैं तो अल्लाह रब्बुल इज्जत उस चीज का बदल हमें अता फरमा देता हैं कभी खुद वही चीज अता फरमा देता हैं जो चीज हमने मांगी हैं कभी उसका बदल अता फरमा देता हैं और कभी ऐसा होता हैं की आपके हक़ में वो दुआ बेहतर नहीं होती तो अल्लाह रब्बुल इज्जत ने उस दुआ की वजह से आपकी किसी मुसीबत को टाल देता हैं कभी कभी ऐसा होता हैं की किसी दुर्घटना से पहले हम बाल बाल बच जाते हैं तो हम जो दुआए मांगे रहते हैं तो इस का असर यह होता हैं की अल्लाह रब्बुल इज्जत उस की वजह से बन्दे की मुसीबत को टाल देता हैं और कभी ऐसा होता हैं की बंदा जब दुआ करता हैं उस दुआ को अल्लाह रब्बुल इज्जत आख़िरत के लिए रख देता हैं |हदीसे मुबारका में मौजूद हैं की क़यामत के दिन एक बंदा ऐसा आएगा जिसके नामे अमाल में बहुत सारी नेकियां होंगी तो वो सोचेगा की इतनी चीजे तो मेने की ही नहीं ये चीजे कहा से आगइ तो अल्लाह रब्बुल इज्जत इरशाद फरमाएगा बन्दे दुनिया में जो तु दुआ मांगता था उस दुआ को हम तेरे लिए आखिरय में जखीरा कर रहे थे तो रब की बारगाह में जब कोई दुआ मांगता हैं तो यक़ीनन अल्लाह रब्बुल इज्जत की बारगाह में वो दुआ जरूर क़ुबूल होती हैं |

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दुआ किस तरह मांगनी चाहिए ( dua mangne ka tarika ) - 

  • दुआ करने से पहले सब से पहला काम वजू करना है सबसे पहले आप बा–वजू हो जाइए
  • फिर आप अल्लाह तआला की हम्द और सना करना और अल्लाह तआला के नाम का वसीला लगाना और शान्त स्वभाव से अल्लाह तआला की इबादत करना और दुआ करना
  • फिर नबी सलल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम पर दुरुदे पाक पड़े
  • किबले की तरफ मुंह करके बैठ जाना चाहिए
  • इस बात का ध्यान रखना चाहिए की हम पाक साफ है या नही दुआ करने से पहले आप पाक साफ जरूर हो जाए
  • दुआ करने से पहले कोई नेक काम करे और फिर चार रकात नमाज पड़ कर दुआ करे
  • सच्चे दिल के साथ झुक कर यह यकीन दिल में रखें की सिर्फ अल्लाह तआला ही दुआ कबूल कर सकता है।
  • दुआ के लिए दोनो घुटनों के बल नीचे बैठ जाए और गर्दन को नीचे झुका ले
  • दोनो हाथों को उठा कर दुआ करना शुरू करे
  • दुआ करते समय इधर–उधर बातें ना करे और पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ दुआ में लगा दे और पूरी अदब के साथ दुआ करे
  • दुआ करते समय अल्लाह तआला के सामने अपने आप को कमजोर जाहिर करे और दुआ करे
  • दुआ करते समय नजर को आसमान की तरफ या उपर की तरफ ना ले जाए
  • दुआओं में गुनाहों का इकरार करे
  • दुआ करते समय यह दिल में रखे के अल्लाह तआला मेरी दुआ जरूर करेगा और दुआ खूब दिल लगाकर करे
  • किसी भी चीज को अल्लाह तआला से मांगते समय उस चीज का कम से कम तीन बार जिक्र करे उस चीज को मांगते समय अल्लाह तआला से कम से कम तीन बार सवाल करे
  • दुआ सिर्फ अपने लिए ही न करे बल्के आपके परिवार वालों गली मोहल्लों वालो और सभी भाइयों के हक में दुआ करे और दूसरों के लिए हमेशा दुआ करते रहें 
  • दुआ खत्म करने से पहले अल्लाह तआला की हम्द ओ सना बयान करे और उस की तारीफ़ बयान करे फिर नबी सलल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम पर दुरूद पड़े और खत्म पर अमीन कहे 
  • इस तरह से दुआ करने से इन्शाह अल्लाह अल्लाह तआला आपकी दुआ को जरूर कुबूल अता फरमाए अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं वो जब चाहे कतरे को समंदर करदे और जब चाहे समंदर को भी कतरा करदे तो सिर्फ और सिर्फ अल्लाह तआला पर यकीन रखे इन्शाह अल्लाह आपकी सब दुआए कबूल होने लगेगी   

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नाम - वसीम अल्वी 
मेल - meraislam765@gmail.com

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